नवग्रह शान्ति पूजा
जैसा कि नाम से ही प्रतित हो रहा है यह “नवग्रह शान्ति पूजा”, ग्रहो की प्रतिकूलता से पीड़ित व्यक्ति को उसके प्रतिकूल ग्रह शांति के लिए कराया जाता है। ज्योतिष में अनिष्ट ग्रहों की शांति का बहुत महत्व होता है। कुंडली परीक्षण के उपरांत अनिष्ट ग्रहों की विधिवत व शास्त्रानुसार शांति करवाकर जातक अपने जीवन में आए कष्टों का निवारण कर सकते हैं।



- ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण जीवन में अनेक तरह की समस्याएं आती हैं। ग्रहों का प्रकोप इतना खतरनाक होता है कि कोई व्यक्ति अपने ही हाथों से खुद को बर्बाद कर लेता है। ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण आपका जीवन नर्क बन सकता है।
- कोई भी ग्रह अशुभ स्थान में बैठा हो तो वह व्यक्ति के जीवन में विपरीत परिस्थितियां पैदा करता है। जिस कारण व्यक्ति का आत्मबल टूटने लगता है और उसका जीवन तनाव और चिंताओं से घिर जाता है।
- नवग्रहों यानि नौ ग्रहों को शांत करने के लिए नवग्रह पूजन ही एकमात्र समाधान है।
यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।
- मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
- धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।
- पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।
- पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।
- धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।
- हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।
पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पण करने का पर्व है श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष, लेकिन अक्सर हम देखते हैं कि कई लोगों के जीवन में परेशानियां समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती। वे चाहे जितना भी समय और धन खर्च कर लें लेकिन काम सफल नहीं होता। ऐसे लोगों की कुंडली में निश्चित रूप से पितृदोष होता है।
यह दोष पीढ़ी दर पीढ़ी कष्ट पहुंचाता रहता है, जब तक कि इसका विधि-विधानपूर्वक निवारण न किया जाए। आने वाली पीढ़ीयों को भी कष्ट देता है। इस दोष के निवारण के लिए कुछ विशेष दिन और समय तय हैं जिनमें इसका पूर्ण निवारण होता है। श्राद्ध पक्ष यही अवसर है जब पितृदोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दोष के निवारण के लिए शास्त्रों में “नारायणबलि पूजा” का विधान बताया गया है।
नारायणबलि पूजा मनुष्य की अपूर्ण इच्छाओं और अपूर्ण कामनाओं की पूर्ति के लिये की जाती है। नारायण बलि ऐसा विधान है, जिसमें अज्ञात/लापता व्यक्ति को मृत मानकर उसका उसी ढंग से क्रियाकर्म किया जाता है, जैसे किसी की मौत होने पर। इस प्रक्रिया में कुश घास से प्रतीकात्मक शव बनाते हैं और उसका वास्तविक शव की तरह ही दाह-संस्कार किया जाता है।
- नवग्रह पूजन से कोई एक ग्रह नहीं बल्कि पूरे नौ ग्रह प्रसन्न होते हैं और आपको एकसाथ नौ ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है।
- अगर आपकी कुंडली में कोई ग्रह नीच या अशुभ स्थान में होकर बुरा प्रभाव डाल रहा है और इसके कारण आपके जीवन में अनेक कठिनाईयां आ रहीं है तो आपको नवग्रह पूजन अवश्य करवाना चाहिए।
- नवग्रह पूजन की सबसे खास बात यही है कि इसे कोई भी करवा सकता है। इस पूजन से आपकी कुंडली के सभी दोष शांत होते हैं।
- सुख-समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए आप नवग्रह पूजन करवा सकते हैं।
नवग्रह शान्ति पूजा प्रक्रिया विवरण :-
- पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 9 no.
- पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 9 no.
चैरिटी : Rs. 42,700/Couple/Head
- पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 5100 (प्रथम दिन) + 1100/दिन
- पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित
- पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 2100/दिन (Optional)