महा रुद्राभिषेक नीलकंठ महादेव जी
- तीर्थनगरी ऋषिकेश में स्थित “नीलकंठ महादेव मंदिर” के बारे में मान्यता है कि शिवजी ने यहां समुद्र मंथन के दौरान निकले विष (हलाहल) को ग्रहण किया था।
- भोलेनाथ अपने नाम के अनुरूप बहूत भोले हैं। भगवान शिव एक लोटा जल से भी प्रसन्न होकर अपने भत्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से व्याक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वहीं महा-रूद्राभिषेक करने से व्यक्ति की कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भास्म हो जाते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है।
- महा-रूद्राभिषेक पूजा 3 प्रकार की होती है।
- 1 पंडित द्वारा 3 दिन का पूजन।
- 1 पंडित द्वारा 2 दिन का पूजन।
- 1 पंडित द्वारा 1 दिन का पूजन।




- भगवान शिव के अनगिनत नामों में एक नाम है नीलकंठ. भोलेनाथ को उनके भक्त नीलकंठ के नाम से भी जानते हैं।
- समुद्र मंथन के दौरान “कालकूट विष” भी निकला. अच्छी चीजों को लेने के लिए तो असुर और सुर दोनों तैयार थे, पर विष लेने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। सबसे खतरनाक बात यह थी कि अगर विष का एक भी बूंद धरती पर गिर जाती तो तबाही मच जाती।
- ऐसे में भगवान शंकर ने लोगों की रक्षा करने के लिए समुद्र से निकले विष को पी लिया, और उसे अपने गले(कंठ) में रोक लिया इससे उनका “कंठ नीला हो गया”।
- मंदिर के समीप पानी का झरना भी है, जहां श्रद्धालु मंदिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं।
यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।
- मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
- धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।
- पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।
- पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।
- धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।
- हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।
पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पण करने का पर्व है श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष, लेकिन अक्सर हम देखते हैं कि कई लोगों के जीवन में परेशानियां समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती। वे चाहे जितना भी समय और धन खर्च कर लें लेकिन काम सफल नहीं होता। ऐसे लोगों की कुंडली में निश्चित रूप से पितृदोष होता है।
यह दोष पीढ़ी दर पीढ़ी कष्ट पहुंचाता रहता है, जब तक कि इसका विधि-विधानपूर्वक निवारण न किया जाए। आने वाली पीढ़ीयों को भी कष्ट देता है। इस दोष के निवारण के लिए कुछ विशेष दिन और समय तय हैं जिनमें इसका पूर्ण निवारण होता है। श्राद्ध पक्ष यही अवसर है जब पितृदोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दोष के निवारण के लिए शास्त्रों में “नारायणबलि पूजा” का विधान बताया गया है।
नारायणबलि पूजा मनुष्य की अपूर्ण इच्छाओं और अपूर्ण कामनाओं की पूर्ति के लिये की जाती है। नारायण बलि ऐसा विधान है, जिसमें अज्ञात/लापता व्यक्ति को मृत मानकर उसका उसी ढंग से क्रियाकर्म किया जाता है, जैसे किसी की मौत होने पर। इस प्रक्रिया में कुश घास से प्रतीकात्मक शव बनाते हैं और उसका वास्तविक शव की तरह ही दाह-संस्कार किया जाता है।
- हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्रार्चन और महा-रूद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है।
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रुद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए महा-रूद्राभिषेक के पूजन के निमित्त अनेक द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया गया है। भक्त महा-रूद्राभिषेक पूजन विभिन्न विधि से तथा विविध मनोरथ को लेकर करते हैं। किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिए तदनुसार पूजन सामग्री तथा विधि से महा-रूद्राभिषेक किया जाता है।
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भोलेनाथ सबसे सरल उपासना से भी प्रसन्न होते हैं लेकिन महा-रूद्राभिषेक उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है। कहते हैं कि महा-रूद्राभिषेक से शिव जी को प्रसन्न करके आप असंभव को भी संभव करने की शक्ति पा सकते हैं तो आप भी सही समय पर महा-रूद्राभिषेक करिए और “शिव कृपा के भागी बनिए…”
- महा-रूद्राभिषेक के विभिन्न पूजन के लाभ इस प्रकार हैं :-
- जल से अभिषेक करने पर वर्षा होती है।
- असाध्य रोगों को शांत करने के लिए कुशोदक से अभिषेक करें।
- भवन-वाहन के लिए दही से अभिषेक करें।
- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से अभिषेक करें।
- धनवृद्धि के लिए शहद एवं घी से अभिषेक करें।
- तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।
- पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से अभिषेक करें।
- रुद्राभिषेक से योग्य तथा विद्वान संतान की प्राप्ति होती है।
- ज्वर की शांति हेतु शीतल जल/ गंगाजल से अभिषेक करें।
- सहस्रनाम मंत्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धारा से अभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है।
- प्रमेह रोग की शांति भी दुग्धाभिषेक से हो जाती है।
- शकर मिले दूध से अभिषेक करने पर जड़बुद्धि वाला भी विद्वान हो जाता है।
- सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रु पराजित होता है।
- शहद के द्वारा अभिषेक करने पर यक्ष्मा (तपेदिक) दूर हो जाती है।
- पातकों को नष्ट करने की कामना होने पर भी शहद से अभिषेक करें।
- गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।
- पुत्र की कामना वाले व्यक्ति शकर मिश्रित जल से अभिषेक करें। ऐसे तो अभिषेक साधारण रूप से जल से ही होता है।
- आदि
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अलग-अलग शिवलिंग और स्थानों पर रुद्राभिषेक करने का फल भी अलग होता है। महा-रूद्राभिषेक घर से ज्यादा मंदिर में, नदी तट पर और सबसे ज्यादा पर्वतों पर फलदायी होता है।
- विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में मंत्र, गोदुग्ध या अन्य दूध मिलाकर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सबको मिलाकर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है। इस प्रकार विविध द्रव्यों से शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने पर अभीष्ट कामना की पूर्ति होती है।
- इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी पुराने नियमित रूप से पूजे जाने वाले शिवलिंग का अभिषेक बहुत ही उत्तम फल देता है किंतु यदि पारद के शिवलिंग का अभिषेक किया जाए तो बहुत ही शीघ्र चमत्कारिक शुभ परिणाम मिलता है। महा-रूद्राभिषेक का फल बहुत ही शीघ्र प्राप्त होता है।
- वेदों में विद्वानों ने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है। पुराणों में तो इससे संबंधित अनेक कथाओं का विवरण प्राप्त होता है। वेदों और पुराणों में रुद्राभिषेक के बारे में कहा गया है और बताया गया है कि रावण ने अपने दसों सिरों को काटकर उसके रक्त से शिवलिंग का अभिषेक किया था तथा सिरों को हवन की अग्नि को अर्पित कर दिया था, जिससे वो त्रिलोकजयी हो गया।
- भस्मासुर ने शिवलिंग का अभिषेक अपनी आंखों के आंसुओं से किया तो वह भी भगवान के वरदान का पात्र बन गया।
- कालसर्प योग, गृहक्लेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यों की बाधाओं को दूर करने के लिए महा-रूद्राभिषेक आपके अभीष्ट सिद्धि के लिए फलदायक है।
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ज्योतिर्लिंग एवं तीर्थस्थान तथा शिवरात्रि प्रदोष, श्रावण के सोमवार आदि पर्वों में शिववास का विचार किए बिना भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है। वस्तुत: शिवलिंग का अभिषेक आशुतोष शिव को शीघ्र प्रसन्न करके साधक को उनका कृपापात्र बना देता है और उनकी सारी समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाती हैं। महा-रूद्राभिषेक से मनुष्य के सारे पाप-ताप धुल जाते हैं।
- स्वयं सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने भी कहा है कि जब हम अभिषेक करते हैं तो स्वयं महादेव साक्षात उस अभिषेक को ग्रहण करते हैं। संसार में ऐसी कोई वस्तु, वैभव, सुख नहीं है, जो हमें महा-रूद्राभिषेक “करने या करवाने” से प्राप्त नहीं हो सकता है।
महा-रुद्राभिषेक पूजा प्रक्रिया विवरण :-
- 1 पंडित द्वारा 3 दिन का पूजन :-
- पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 3 no.
- पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.
- 1 पंडित द्वारा 2 दिन का पूजन :-
- पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 2 no.
- पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.
- 1 पंडित द्वारा 1 दिन का पूजन :-
- पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.
- पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.
1 पंडित द्वारा 3 दिन का पूजन :-
चैरिटी : Rs. 11,700/Couple/Head
- पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 5100
- पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित/दिन
- पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100/दिन (Optional)
- इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद : Rs. 5100/दिन
1 पंडित द्वारा 1 दिन का पूजन :-
चैरिटी : Rs. 9,300/Couple/Head
- पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 2100
- पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित
- पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100/दिन (Optional)
- इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद : Rs. 5100/दिन