शिव महापुराण कथा/ शिव पुराण कथा
‘शिव पुराण’ का सम्बन्ध शैव मत से है। शिव पुराण में भगवान शंकर के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। शिवमहापुराण में भगवान शिव और देवी पार्वती के बारे में और उनकी गाथा का विवरण पूर्ण रूप से दिया गया है।Read More…




- यह पुराण परम पवित्र वेद की प्रसिद्ध श्रुतियों के अर्थ से अनुमोदित, अखिल शास्त्रों के रहस्यका स्रोत तथा आगमों में अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पाँचों लक्षणों से पूर्ण हैं। इस पुराण में लगभग 16,000 श्लोक है।
- श्री मद् देवी भागवत् पुराण सभी शास्त्रों तथा धार्मिक ग्रंथों में महान है। इसके सामने बड़े-बड़े तीर्थ और व्रत नगण्य हैं। इस पुराण के सुनने से पाप सूखे वन की भांति जलकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे मनुष्य को शोक, क्लेश, दु:ख आदि नहीं भोगने पड़ते। जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश के सामने अंधकार छंट जाता है, उसी प्रकार भागवत् पुराण के श्रवण से मनुष्य के सभी कष्ट, व्याधियां और संकोच समाप्त हो जाते हैं।
- अठारह पुराणों में देवी भागवत पुराण उसी प्रकार सर्वोत्तम है, जिस प्रकार नदियों में गंगा, देवों में शंकर, काव्यों में रामायण, प्रकाश स्रोतों में सूर्य, शीतलता और आह्लाद में चंद्रमा, कर्मशीलों में पृथ्वी, गंभीरता में सागर और मंत्रों में गायत्री आदि श्रेष्ठ हैं। यह पुराण श्रवण सब प्रकार के कष्टों का निवारण करके आत्मकल्याण करता है। भक्तों को ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है।
- जो व्यक्ति शिवपुराण को पढ़ता है या सुनता है, उसे भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
- अगर किसी व्यक्ति से अनजाने या जान-बूझकर कोई पाप हो जाए तो अगर वो शिवपुराण को पढ़ता या सुनता है तो उसे घोर से घोर पाप से छुटकारा मिल जाता है।
- जो व्यक्ति शिवपुराण को पढ़ता या सुनता है, उनके मृत्यु के बाद शिव के गण लेने आते हैं।
- सावन में शिव पुराण का पाठ करने से उसका फल बहुत ही सुखदायी होता है।
- लोग गंगा जी के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा रखते हैं तथा मृत्यु पश्चात गंगा में अपनी राख विसर्जित करना मोक्ष प्राप्ति के लिये आवश्यक समझते हैं।
- जिन महिलाओं की शादी नहीं हो पा रही, उन्हें भी इसका पाठ करने से अपना इच्छित वर पाने में मदद मिलती है।
- सावन के सोमवार इतने शुभ माने जाते हैं कि इस दौरान महिलाओं की पूजा-अर्चना से उनके पति का दुर्भाग्य भी सौभाग्य में परिवर्तित हो जाता है। इस दौरान श्री शिवमहापुराण पढ़ने और सुनने का विशेष फल मिलता है।
शिव महापुराण कथा पाठ-पूजा प्रक्रिया विवरण :-
- पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 9 no.
- पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 5 no.
चैरिटी : Rs. 1,47,500+ मंच लागत + सजावट
- पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 5100 (प्रथम दिन) + 500/पंडित/दिन
- पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित/दिन
- व्यास/ कथा वाचक को दक्षिणा : Rs. 3000/दिन
- पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला/हॉल/टेंट : Rs. 1100/दिन (Optional) के लिये दान
- पाठ के लिये मूर्ति स्थापना एवं मंच निर्माण : Rs. 500 से Rs. 11000 /दिन (Optional)
- पाठ के लिये सजावट : Rs. 500 से Rs. 11000 /दिन (Optional)