सामान्य श्राद्ध – पूजा

सामान्य श्राद्ध – पूजा

मान्यता के अनुसार अपने पितरों की स्मति में श्रद्धापूर्वक किया गया दान आदि कर्म ही श्राद्ध है। कई जानकारों के अनुसार अपने पूर्वजों की स्मति में दान, भोजन दान के अलावा पेड़ लगाना किसी असहाय की सहायता करना, रोगी की आर्थिक या शारीरिक सहायता करना, पुस्तक, वस्लदान करना भी श्राद्ध के अंतर्गत ही आता है।

यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पण करने का पर्व है श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष, लेकिन अक्सर हम देखते हैं कि कई लोगों के जीवन में परेशानियां समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती। वे चाहे जितना भी समय और धन खर्च कर लें लेकिन काम सफल नहीं होता। ऐसे लोगों की कुंडली में निश्चित रूप से पितृदोष होता है।

यह दोष पीढ़ी दर पीढ़ी कष्ट पहुंचाता रहता है, जब तक कि इसका विधि-विधानपूर्वक निवारण न किया जाए। आने वाली पीढ़ीयों को भी कष्ट देता है। इस दोष के निवारण के लिए कुछ विशेष दिन और समय तय हैं जिनमें इसका पूर्ण निवारण होता है। श्राद्ध पक्ष यही अवसर है जब पितृदोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दोष के निवारण के लिए शास्त्रों में  “नारायणबलि पूजा”  का विधान बताया गया है।

नारायणबलि पूजा मनुष्य की अपूर्ण इच्छाओं और अपूर्ण कामनाओं की पूर्ति के लिये की जाती है। नारायण बलि ऐसा विधान है, जिसमें अज्ञात/लापता व्यक्ति को मृत मानकर उसका उसी ढंग से क्रियाकर्म किया जाता है, जैसे किसी की मौत होने पर।  इस प्रक्रिया में कुश घास से प्रतीकात्मक शव बनाते हैं और उसका वास्तविक शव की तरह ही दाह-संस्कार किया जाता है।

श्राद्ध-पूजा प्रक्रिया विवरण :-

चैरिटी : Rs. 9,400/Couple/Head

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