सनातन धर्म व अखाड़ों से जुड़ा ट्रस्ट।


आप इस कार्य से “प्रत्यक्ष” एंव “अप्रत्यक्ष” रूप से निम्नलिखित रूप में जुड़ सकते हैं। :-
प्रत्यक्ष रूप :-
- 1. ट्रस्ट में ट्रस्टी बन के वैचारिक, आर्थिक एंव संचालिक तरीके से।
- 2. ट्रस्ट में दान कर के।
- 3. ट्रस्ट का प्रचार-प्रसार करके, ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को इससे जोड़ कर, जिससे वो धर्म-कर्म में रुचि लें, और फिर धर्म-कर्म के कार्यो में जुट जायें।
अप्रत्यक्ष रूप :-
- 1. ट्रस्ट के उत्पादों की खरीदारी करके।
- 2. ट्रस्ट की सेवाओं को इस्तेमाल करके।
- 3. जो भी धन आप ट्रस्ट कि सेवाओं और उत्पादों पर खर्च करेंगें, उनका इस्तेमाल ट्रस्ट के उद्येश्यों को पूरा करने के लिए होगा।