

॥ १ ॥
बीज मंत्र
ॐ क्रीं काली।
॥ २ ॥
देवी काली मंत्र
ॐ क्रीं कालिकायै नमः।
॥ ३ ॥
महा काली मंत्र
ॐ श्री महा कालिकायै नमः।
॥ ४ ॥
क्लीं काली मंत्र
ॐ क्लीं कालिकायै नमः।
॥ ५ ॥
महा काली गायत्री मंत्र
ॐ महा काल्यै छ विद्महे स्मसन वासिन्यै छ धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात।
॥ १ ॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं।
॥ २ ॥
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
॥ ३ ॥
क्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणेकालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा।
॥ ४ ॥
ॐ ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
॥ ५ ॥
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके स्वाहा।
॥ ६ ॥
ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिके क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं॥
ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं॥
क्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणेकालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा॥
॥ ७ ॥
कृन्ग कृन्ग कृन्ग हिन्ग कृन्ग दक्षिणे कलिके कृन्ग कृन्ग कृन्ग हरिनग हरिनग हुन्ग हुन्ग स्वाहा।
॥ ८ ॥
क्रीं क्रीं क्रीं हिन्ग क्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा।
॥ १ ॥
काली मंत्र (सभी रोगों के नाश हेतु)
ॐ क्रीं महाकाली सर्व रोगं नासी नासी।
॥ २ ॥
आद्य काली मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं आद्य कालिका परम ईश्वरी स्वाहा।
॥ ३ ॥
त्रिशब्द मंत्र
ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं।
॥ ४ ॥
पंचशब्द मंत्र
ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं हूं फट।
॥ ५ ॥
शरीर में ऊर्जा भरने का मंत्र
ॐ हूँ ह्रीं हूँ फट् स्वाहा।
॥ ६ ॥
भद्रकाली मंत्र
ॐ ह्रौं काली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा।
काली मंत्रों का जाप साधक को आंतरिक शक्ति, साहस और निर्भयता प्रदान करता है। ये मंत्र न केवल बाहरी बाधाओं को दूर करते हैं, बल्कि अंदर छिपे भय और नकारात्मकता का भी नाश करते हैं। दक्षिण काली मंत्र विशेष रूप से शांति और कल्याण के लिए माने जाते हैं।
ॐ काली माँ की शरण में,
सब भय मिटें, सब सुख हों।
जय माँ काली, जय माँ काली॥