

शिशु के स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं उज्ज्वल भविष्य
शिशु के स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद प्राप्त होगा
यह विशेष पूजा आपकी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए की जाती है। श्रद्धा एवं आवश्यकता अनुसार पूजा का चयन करें। पूजा के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक संतुलन की प्राप्ति होती है। यह पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में सहायक मानी जाती है। अपनी मनोकामना के अनुसार उपयुक्त पूजा का चयन कर श्रद्धापूर्वक संकल्प करें। श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से मन को शांति एवं सकारात्मकता का अनुभव होता है।
अब तक 3,00,000+ भक्तों ने मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओं में भाग ले चुके हैं
मुंडन चूड़ा कर्म संस्कार पूजा शिशु के प्रथम केश उतारने, शुभ जीवन आरंभ, स्वास्थ्य मंगलकामना तथा सनातन परंपरा अनुसार संस्कार पूर्ण करने हेतु किया जाने वाला पावन वैदिक अनुष्ठान है। हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में चूड़ाकर्म संस्कार का विशेष महत्त्व माना गया है, जिसे बच्चे के जीवन के महत्वपूर्ण आरंभिक संस्कारों में शामिल किया जाता है।
इस संस्कार में शिशु के जन्म के बाद पहली बार विधि-विधान से बाल उतारे जाते हैं। इसे मुंडन संस्कार या चूड़ाकर्म संस्कार भी कहा जाता है। यह अनुष्ठान शिशु के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, बुद्धि विकास, सकारात्मक ऊर्जा तथा शुभ भविष्य की कामना से कराया जाता है।
सनातन मान्यताओं के अनुसार मुंडन संस्कार से शिशु के जीवन में शुद्धता, शुभता और नए संस्कारों का प्रवेश होता है। यह संस्कार बच्चे के मानसिक विकास, तेज, ऊर्जा तथा समग्र कल्याण हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है। अनेक परिवार इसे शुभ मुहूर्त में तीर्थ स्थल या पवित्र स्थान पर कराना पसंद करते हैं।
इस पावन अनुष्ठान में भगवान गणेश, भगवान विष्णु एवं कुल देवताओं का पूजन कर संकल्प लिया जाता है, तत्पश्चात अनुभवी आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार सहित मुंडन चूड़ा कर्म संस्कार पूजा संपन्न कराई जाती है।
यदि आप घर बैठे या पावन धर्मनगरी हरिद्वार में मुंडन चूड़ा कर्म संस्कार पूजा कराना चाहते हैं, तो यह सेवा आपको सनातन परंपरा से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करती है। यह संस्कार परिवार, शिशु एवं विशेष संकल्प अनुसार कराया जा सकता है।
शिशु एवं परिवार की उपस्थिति आवश्यक
मुंडन चूड़ाकर्म संस्कार शिशु एवं परिवार की उपस्थिति में ही विधिवत संपन्न कराया जाता है।
गणेश पूजन एवं संकल्प
शिशु के नाम, गोत्र एवं परिवार की मंगलकामना अनुसार विधिवत संकल्प लेकर भगवान गणेश एवं कुल देवताओं का पूजन किया जाएगा।
मुंडन / चूड़ाकर्म संस्कार विधि
शुभ मुहूर्त में वैदिक रीति-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ शिशु के प्रथम केश उतारने की पावन विधि संपन्न कराई जाएगी।
वैदिक मंत्रोच्चार एवं आशीर्वाद
अनुभवी आचार्यों द्वारा शिशु के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, बुद्धि विकास एवं उज्ज्वल भविष्य हेतु मंगल मंत्रों का उच्चारण किया जाएगा।
आरती एवं मंगल प्रार्थना
संस्कार पूर्ण होने पर परिवार सहित आरती कर शिशु के सुख, समृद्धि एवं जीवन कल्याण की प्रार्थना की जाएगी।
प्रसाद एवं आशीर्वचन
संस्कार उपरांत प्रसाद वितरण एवं शिशु को शुभ आशीर्वाद प्रदान किया जाएगा।




मुंडन चूड़ा कर्म संस्कार पूजा सेवा विशेष रूप से केवल धर्मनगरी हरिद्वार की पावन भूमि पर संपन्न कराई जाती है। हरिद्वार, उत्तराखंड सनातन धर्म के प्रमुख एवं प्राचीन तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है, जिसे माँ गंगा जी की धरती, देवभूमि का द्वार और मोक्षप्रदा नगरी के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है।
मोक्षदायिनी एवं पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी के पावन तट पर स्थित हरिद्वार को पूजा-पाठ, दान-पुण्य, जप, तप, हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों हेतु अत्यंत श्रेष्ठ तीर्थभूमि माना गया है। सनातन मान्यताओं के अनुसार इस पावन तीर्थक्षेत्र में श्रद्धापूर्वक किया गया पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं यज्ञ कर्म सामान्य स्थानों की अपेक्षा अनेक गुना अधिक विशेष पुण्यफल प्रदान करने वाला माना जाता है।
पुराणों एवं शास्त्रों में वर्णित है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार आकर गंगा स्नान, पूजा-पाठ एवं दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे आत्मशुद्धि, पाप क्षय और मोक्ष मार्ग की प्राप्ति की मान्यता है। इसी कारण हरिद्वार को मोक्ष का द्वार भी कहा जाता है।
हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की संयुक्त कृपा से पूजनीय भूमि मानी जाती है, इसलिए इसे देवताओं का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। चारधाम यात्रा का प्रमुख प्रारंभिक तीर्थ भी हरिद्वार ही माना जाता है।
वैदिक ऊर्जा, आध्यात्मिक वातावरण और पावन महिमा से युक्त इसी दिव्य भूमि पर मुंडन चूड़ा कर्म संस्कार पूजा पूर्ण श्रद्धा, नियम और शास्त्रसम्मत विधि से संपन्न कराई जाती है।
BhaktiSense.com, धार्मिक ट्रस्ट उमा महेश्वर सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित मंच है, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं को हरिद्वार की इसी पावन भूमि पर पूजा, यज्ञ, दान-पुण्य एवं तीर्थ सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
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जिन भक्तों ने हमारे साथ पूजा बुक की उनका अनुभव जाने

गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश
BhaktiSense के माध्यम से हमारे परिवार की पूजा अत्यंत दिव्य और शांतिपूर्ण रही। सभी विधियां पूरी श्रद्धा से सम्पन्न हुईं।

हरिद्वार, उत्तराखंड
BhaktiSense की सेवा और पूजा व्यवस्था अत्यंत शानदार और भक्तिमय रही।

पेंसिल्वेनिया, अमेरिका
विदेश में रहते हुए भी BhaktiSense ने हमें अपनी परंपराओं और संस्कृति से जोड़े रखा।