
हनुमान जी की कृपा
हनुमान जी की कृपा, मानसिक शांति एवं आत्मविश्वास प्राप्त होगा
यह विशेष पूजा आपकी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए की जाती है। श्रद्धा एवं आवश्यकता अनुसार पूजा का चयन करें। पूजा के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक संतुलन की प्राप्ति होती है। यह पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में सहायक मानी जाती है। अपनी मनोकामना के अनुसार उपयुक्त पूजा का चयन कर श्रद्धापूर्वक संकल्प करें। श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से मन को शांति एवं सकारात्मकता का अनुभव होता है।
अब तक 3,00,000+ भक्तों ने मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओं में भाग ले चुके हैं
सुंदरकांड पाठ एवं कथा रामचरितमानस के अत्यंत पावन एवं लोकप्रिय अंश सुंदरकांड का शुभ धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। सनातन परंपरा में सुंदरकांड का पाठ हनुमान जी की कृपा, साहस, रक्षा, संकट निवारण और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्ति हेतु विशेष महत्त्व रखता है।
सुंदरकांड पाठ एवं कथा में सुंदरकांड का विधिवत पाठ तथा विद्वान कथा वाचकों द्वारा पावन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाता है। इसे घर, परिवार और जीवन में शांति, शक्ति, भय से राहत, कार्य सिद्धि तथा मंगलकारी फल प्राप्ति हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक सुंदरकांड पाठ कराने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास, बाधाओं में राहत, नकारात्मकता से रक्षा तथा शुभ फल की प्राप्ति होती है। अनेक श्रद्धालु इसे विशेष मनोकामना पूर्ति, संकट निवारण, नए कार्यारंभ, स्वास्थ्य मंगलकामना, गृह शांति अथवा पारिवारिक कल्याण की कामना से कराते हैं।
इस पावन अनुष्ठान में भगवान श्रीराम, माता सीता एवं हनुमान जी का पूजन कर संकल्प लिया जाता है, तत्पश्चात अनुभवी आचार्यों एवं कथा वाचकों द्वारा सुंदरकांड पाठ एवं कथा संपन्न कराया जाता है।
यदि आप घर बैठे सुंदरकांड पाठ एवं कथा कराना चाहते हैं, तो यह सेवा आपको पावन धर्मनगरी हरिद्वार से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है। यह अनुष्ठान व्यक्तिगत, दंपति, परिवार अथवा विशेष संकल्प अनुसार कराया जा सकता है।
नाम, गोत्र एवं मनोकामना अनुसार विधिवत संकल्प लेकर भगवान श्रीराम, माता सीता एवं हनुमान जी का पूजन किया जाएगा।
अनुभवी वैदिक आचार्यों एवं विद्वान कथा वाचकों द्वारा सुंदरकांड का विधिवत पाठ तथा भावपूर्ण कथा वाचन संपन्न किया जाएगा।
अनुष्ठान पूर्ण होने पर भगवान श्रीराम एवं हनुमान जी की आरती तथा परिवार मंगलकामना की जाएगी।
वैदिक रीति-विधान से हवन कर संकट निवारण, रक्षा, सुख-समृद्धि एवं मनोकामना सिद्धि की प्रार्थना की जाएगी।
श्रद्धालु ऑनलाइन माध्यम / लाइव वीडियो कॉल द्वारा अनुष्ठान से जुड़ सकते हैं तथा अपने परिवारजनों को भी सम्मिलित कर सकते हैं।
अनुष्ठान उपरांत प्रसाद एवं गंगाजल श्रद्धापूर्वक आपके पते पर भेजा जाएगा।




"सुंदरकांड पाठ एवं कथा" सेवा श्रद्धालुओं की सुविधा अनुसार ऑनलाइन, ऑफलाइन तथा विशेष आयोजन स्वरूप संपन्न कराई जा सकती है। यह पावन अनुष्ठान मुख्य रूप से हरिद्वार की धर्ममय भूमि पर वैदिक रीति-विधान से कराया जाता है, जहाँ माँ गंगा नदी का पावन वातावरण इस आयोजन को और भी मंगलकारी बनाता ह
छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक "सुंदरकांड पाठ एवं कथा" का आयोजन हरिद्वार में विधिवत कराया जाता है। श्रद्धालु भारत या विदेश में कहीं से भी लाइव कॉल / ऑनलाइन माध्यम द्वारा इस पावन अनुष्ठान से जुड़ सकते हैं तथा अपने परिवारजनों एवं आमंत्रित सदस्यों को भी इसमें सम्मिलित कर सकते हैं।
विशेष रूप से बड़े धार्मिक आयोजनों, विशाल सत्संगों अथवा भव्य कार्यक्रमों हेतु यह अनुष्ठान श्रद्धालु द्वारा बताए गए स्थल पर भी आयोजित किया जा सकता है। ऐसे आयोजनों के लिए अनुभवी आचार्य, विद्वान कथा वाचक तथा संपूर्ण पूजन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।
इस प्रकार यह सेवा श्रद्धा, सुविधा, प्रामाणिकता और सनातन परंपरा का सुंदर संगम है, जहाँ आप हरिद्वार से आध्यात्मिक अनुभव के साथ "अखंड रामायण पाठ एवं कथा" का आयोजन करा सकते हैं।
मोक्षदायिनी एवं पतित-पावनी "माँ श्री गंगा जी" के पावन तट पर स्थित हरिद्वार को पूजा-पाठ, दान-पुण्य, जप, तप, हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों हेतु अत्यंत श्रेष्ठ तीर्थभूमि माना गया है। सनातन मान्यताओं के अनुसार इस पावन तीर्थक्षेत्र में श्रद्धापूर्वक किया गया पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं यज्ञ कर्म सामान्य स्थानों की अपेक्षा अनेक गुना अधिक विशेष पुण्यफल प्रदान करने वाला माना जाता है।
पुराणों एवं शास्त्रों में वर्णित है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार "हरिद्वार" आकर गंगा स्नान, पूजा-पाठ एवं दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे आत्मशुद्धि, पाप क्षय और मोक्ष मार्ग की प्राप्ति की मान्यता है। इसी कारण हरिद्वार को "मोक्ष का द्वार" भी कहा जाता है।
"हरिद्वार" भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की संयुक्त कृपा से पूजनीय भूमि मानी जाती है, इसलिए इसे "देवताओं का प्रवेश द्वार" भी कहा जाता है। चारधाम यात्रा का प्रमुख प्रारंभिक तीर्थ भी हरिद्वार ही माना जाता है।
वैदिक ऊर्जा, आध्यात्मिक वातावरण और पावन महिमा से युक्त इसी दिव्य भूमि पर "सुंदरकांड पाठ एवं कथा" पूर्ण श्रद्धा, नियम और शास्त्रसम्मत विधि से संपन्न कराई जाती है।
"BhaktiSense.com", धार्मिक ट्रस्ट "उमा महेश्वर सेवा ट्रस्ट" द्वारा संचालित मंच है, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं को हरिद्वार की इसी पावन भूमि पर पूजा, यज्ञ, दान-पुण्य एवं तीर्थ सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
जानिए प्रिय भक्तों का BhaktiSense के बारे में क्या कहना है!
जिन भक्तों ने हमारे साथ पूजा बुक की उनका अनुभव जाने

गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश
BhaktiSense के माध्यम से हमारे परिवार की पूजा अत्यंत दिव्य और शांतिपूर्ण रही। सभी विधियां पूरी श्रद्धा से सम्पन्न हुईं।

हरिद्वार, उत्तराखंड
BhaktiSense की सेवा और पूजा व्यवस्था अत्यंत शानदार और भक्तिमय रही।

पेंसिल्वेनिया, अमेरिका
विदेश में रहते हुए भी BhaktiSense ने हमें अपनी परंपराओं और संस्कृति से जोड़े रखा।