माता की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
मन को संतोष, शांति और अशांति से मुक्ति मिलती है।
सच्ची भावना से की गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
संकट, नकारात्मकता और अनजानी परेशानियों से रक्षा होती है।
श्रद्धा, धैर्य और कृतज्ञता का भाव बढ़ता है।
घर में सुख, सौहार्द और सौभाग्य आता है।
जाप विधि
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व दिशा या माता की मूर्ति के सामने बैठें।
जाप शुरू करने से पहले दीप और धूप जलाएं।
प्रत्येक मंत्र का 3, 9 या 11 बार जाप करें, अथवा माला से 108 बार करें।
शुक्रवार के दिन जाप करना विशेष शुभ माना जाता है।
जाप के बाद गुड़ और चने का प्रसाद अर्पित करें।
मन को शांत और एकाग्र रखते हुए श्रद्धापूर्वक जाप करें, जल्दबाज़ी न करें।
अर्थ
प्रत्येक "नमः" संतोषी माता के भिन्न-भिन्न रूपों और गुणों को नमन करता है — गणेश जी की पुत्री, संकटों की निवारक, संतोष की महादेवी, समस्त इच्छाओं की पूर्ति करने वाली, और सौम्य-कृपामयी ललिता स्वरूप। इन नामों का एक साथ जाप करना माता के अनेक स्वरूपों को एक ही साधना में सम्मान देने का माध्यम है।