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माँ पूर्णागिरि यात्रा
हम आपकी यह माँ श्री पूर्णागिरि जी दर्शन यात्रा सड़क मार्ग द्वारा “2 दिन और 2 रात” में Ex- हरिद्वार से पूरे विधि-विधान द्वारा संपन्न करवाते हैं।



माँ श्री पूर्णागिरि जी
माँ श्री पूर्णागिरि जी मंदिर की स्थापना :-
- पूर्णागिरी मंदिर की यह मान्यता है कि जब भगवान शिवजी तांडव करते हुए यज्ञ कुंड से सती के शरीर को लेकर आकाश गंगा मार्ग से जा रहे थे। तब भगवान विष्णु ने तांडव नृत्य को देखकर सती के शरीर के अंग के टुकड़े कर दिए जो आकाश मार्ग से पृथ्वी के विभिन्न स्थानों में जा गिरी।
- कथा के अनुसार जहा जहा देवी के अंग गिरे वही स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गए। माता सती का “नाभि” अंग चम्पावत जिले के “पूर्णा” पर्वत पर गिरने से “माँ पूर्णागिरी जी मंदिर” की स्थापना हुई।
माँ श्री पूर्णागिरि जी मंदिर की स्थापना :-
- पुराणों के अनुसार महाभारत काल में प्राचीन ब्रह्मकुंड के निकट पांडवों द्वारा देवी भगवती की आराधना तथा बह्मदेव मंडी में सृष्टिकर्ता ब्रह्मा द्वारा आयोजित विशाल यज्ञ में एकत्रित अपार सोने से यहां सोने का पर्वत बन गया । सन् 1632 में कुमाऊं के राजा ज्ञान चंद के दरबार में गुजरात से पहुंचे श्रीचन्द्र तिवारी को इस देवी स्थल की महिमा स्वप्न में देखने पर उन्होंने यहा मूर्ति स्थापित कर इसे संस्थागत रूप दिया।
- देश के चारों दिशाओं में स्थित कालिकागिरि, हेमलागिरि व मल्लिकागिरि में मां पूर्णागिरि का यह शक्तिपीठ सर्वोपरि महत्व रखता है। आसपास जंगल और बीच में पर्वत पर विराजमान हैं “भगवती दुर्गा “ । इसे शक्तिपीठों में गिना जाता है । इस शक्तिपीठ में पूजा के लिए वर्ष-भर यात्री आते-जाते रहते हैं | चैत्र मास की नवरात्र में यहां मां के दर्शन का विशेष महत्व बढ जाता है |
यात्रा कार्यक्रम/Itinerary
Itinerary :- माँ श्री पूर्णागिरि जी दर्शन (2 Days & 2 Nights)
Day 01 :- हरिद्वार से सीतापुर
- हमारे प्रतिनिधि हरिद्वार रेल्वे
स्टेशन/ बस स्टैंड/ जौलीग्रांट हवाई-अड्डे पर
आपका स्वागत एवं रिसीव करेंगें। - हरिद्वार पहुंचने पर होटल में Check-In करें।
- शाम को माँ मनसा देवी जी, माँ चंडी देवी जी के दर्शन करें और गंगा स्नान कर माँ गंगा जी की विश्व प्रसिद्ध आरती में प्रतिभाग करें।
रात्रि विश्राम हरिद्वार में।
Day 02 :- सीतापुर से श्री केदारनाथ जी
- माँ श्री पूर्णागिरि जी दर्शन।
Day 03 :- श्री केदारनाथ जी से सीतापुर
- हरिद्वार से प्रस्थान पर, हम आपको एयरपोर्ट/ बस स्टैंड/ रेलवे स्टेशन जहाँ पर आप चाहें वहाँ पर आपको पहुँचाते हैं।
भोजन :-
- ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर।
- शुद्ध शाकाहारी/सात्विक (बिना लहसून प्याज के)।
- हरिद्वार — दो धाम — हरिद्वार तक रोड ट्रिप।
- रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व एयरपोर्ट से पिकअप और ड्रॉप सुविधाएं।
- आपके हरिद्वार आगमन पर आपको फ्री होटल एवं फ्री वाहन सुविधा।
- यात्रा में समस्त भोजन (ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर)।
डीलक्स होटल में आवासीय सुविधा :-
- कॉम्प्लीमेंट्री आधार पर 1 रात की आवासीय सुविधा हरिद्वार होटल में।
- मार्ग में कोई भी निजी खर्च जैसे टेलीफोन कॉल, टिप्स और लांड्रि आदि।
- वीडियोग्राफी
- इंश्योरेंस/बीमा :- Optional
पूजा शुल्क का भुगतान सीधे यात्रियों को करना होगा। - किसी भी परिचालन या मौसम परिवर्तन आदि के कारण कोई दावा या विलंब शुल्क। या कोई अन्य चीजें जो लागत में उल्लिखित नहीं हैं।
- टैक्स, ईंधन, रॉयल्टी शुल्क, आदि में किसी तरह की नई वृद्धि से परिवहन और व्यवस्था की लागत में वृद्धि सम्भव है, जो प्रस्थान करने से पहले प्रभावी हो सकती है।
- चारों धाम में V.I.P दर्शन (श्री केदारनाथ जी, श्री बद्रीनाथ जी, श्री गंगोत्री जी, श्री यमुनोत्री जी)।
- यात्रा राशि का 50% जमा करके अग्रिम बुकिंग की जा सकती है और शेष राशि यात्रा की तारीख से 15 दिन पहले जमा करनी होगी।
- यदि यात्रा निर्धारित समय के भीतर समाप्त नहीं होती है और यात्री खराब मौसम की स्थिति / तकनीकी कारणों से एक या अधिक धामों की यात्रा करने में सक्षम नहीं होते हैं, तो संस्था निर्धारित समय के भीतर सभी स्थानों पर जाने का प्रयास करेगी। हालांकि यदि यह संभव नहीं है, तो जो भी खर्चा बढ़ेगा वो यात्रियों द्वारा वहन किया जायेगा।
- अगली तारीख को बुकिंग का पुनर्निर्धारण उपलब्धता के अधीन और लागत के 10% के अतिरिक्त भुगतान पर किया जाएगा। इसकी अनुमति केवल तभी दी जाएगी जब यात्रा की तारीख से 15 दिन पहले आवेदन किया गया हो। यदि यात्रा के 15 दिनों से कम समय के लिए पुनर्निर्धारण का अनुरोध किया जाता है, तो बुकिंग को रद्द माना जाएगा और उपलब्धता के अधीन एक नई बुकिंग दी जाएगी।
- खराब मौसम की स्थिति में यदि आप किसी भी दिनों में से किसी विशेष दिन खराब मौसम की स्थिति में फंसे हुए हैं तो भी हम अगले दिन दर्शन करावाने का प्रयास करेंगे। यदि हम खराब मौसम की वजह से किसी भी धाम की यात्रा करने में पूरी तरह से असमर्थ हैं, तो यात्रियों द्वारा विचार विमर्श कर आगे का कार्यक्रम तय किया जायेगा, पर यात्रा को लेकर सारे अधिकार संस्था के अधीन होंगें और संस्था का निर्णय ही मान्य होगा।