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आध्यात्मिक ध्यान



Charity $ 330
ध्यान एक जीवन पद्धति है, यह सांसारिक और आध्यात्मिक बाधओं से भी मुक्ति दिलाता है। इससे आध्यात्मिक और शारीरिक लाभ होता है। कई दशकों से हमारा समाज अनेक व्याधियों का शिकार होता जा रहा है। भागती-दौड़ती जिंदगी, हमारी आहारचर्या और दिनचर्या से हम तनावग्रस्त हो गये हैं। व्यायाम और ‘योग’ के लिए हमारे पास समय ही नहीं है।
पहले तो बुजुर्ग होने पर आदमी बीमार होता था और अब तो हमारी युवा पीढ़ी अर्थराइटिस, ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक तथा डिप्रेशन जैसी बीमारियों की गिरफ्रत में हैं। योग, ध्यान और संतुलित आहारचर्या तथा नियमित दिनचर्या से हम स्वस्थ रह सकते हैं।
‘ध्यान’ स्वयं को सांसारिकता से अलग करने या अपने आपको चारो ओर से बंद करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह संसार के सत्य की समझ है। ‘ध्यान’ का अर्थ है इस संसार के पार चले जाना, जहां प्रज्ञा रूपी महल पर आसीन होकर तटस्थ, कूटस्थ या साक्षी होकर विवेक की आंख से तुम स्वयं को और दुनिया को देख पाओगे। तब तुम्हें इस सम्पूर्ण जगत में ईश्वर का सौन्दर्य दिखेगा।
‘ध्यान’ जड़ता और मूढ़ता नहीं है वरन प्रज्ञा के उच्च शिखर, ऋतम्भरा से पूर्ण चैतन्य हो जाना है। जहां जड़ता और मूढ़ता पूरी तरह से मिट जाती है और अंत में साध्क का चित्त र्निबीज हो जाता है। उस निर्बीज में वासनाओं के अंकुर उसी तरह नहीं फूटते जिस तरह भुने हुए चने की अंकुरण क्षमता समाप्त हो जाती है। ‘ध्यान’ संसार से पलायन नहीं है। ध्यान से ही शून्य जैसी चैतन्यपूर्ण स्थिति में प्रवेश पाया जा सकता है। अज्ञात में उतरकर ही ज्ञात के द्वार खुलते हैं। निर्विकार स्थिति में पहुंचने पर ‘दिव्य’ विचार का प्रादुर्भाव होता है। ‘ध्यान’ से आध्यात्मिक, शारीरिक तथा मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं।
आध्यात्मिक लाभ 1. ध्यान से ज्ञान में वृद्धि होती है। 2. नई सोच का उदय होता है। 3. ध्यान हमारे जीवन को व्यवस्थित करता है। 4. ध्यान हमें अपने वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है। 5. ध्यान से शरीर, मन और आत्मा में संतुलन आता है।
शारीरिक लाभ 1. ध्यान करने से रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। 2. मांसपेशियों में जकड़न कम होती है। 3. ध्यान सिरदर्द एवं माइग्रेन में आराम दिलाता है। 4. ध्यान शरीर को हानिकारक पदार्थों से बचाता है। 5. ध्यान से चेहरे पर ओज और तेज आता है।
मनोवैज्ञानिक लाभ 1. ध्यान आत्म-विश्वास और सहनशीलता को बढ़ाता है। 2. ध्यान से सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है। 3. ध्यान एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाता है। 4. ध्यान अशांत एवं चंचल विचारों को शांत करता है। 5. ध्यान भावनात्मक स्थिरता को बढ़ाता है।
‘योग’ और ध्यान सभी जाति, उम्र, रंग, नस्ल, धर्म तथा अमीर-गरीब सबके लिए उपयोगी है। ‘ध्यान’ का अभ्यास करने से एकाग्रता, आत्मनियंत्रण, सहनशीलता, मन की शांति और जीवन में सकारात्मक सोच आती है। योग तथा ध्यान से कई तरह के साध्य तथा असाध्य दोनों तरह से रोग ठीक होते हैं। यह व्याधियों से ही मुक्ति नहीं दिलाता वरन ‘जीवन मुक्ति’ का भी साधन है।
योगिक जीवन शैली का अनुभव करें
क्या आप दिल से अपने अंदर के काम करने की इच्छा रखते हैं? आश्रम में एक रिट्रीट इसके लिए जगह प्रदान करता है। यह योगिक और आयुर्वेद जीवनशैली का एक संपूर्ण अनुभव है, जिसमें सार्थक प्रथाओं, सच्चे योगिक विषयों और साझा करने की जगह है।
आश्रम का स्थान : तपोवन, ऋषिकेश, उत्तराखंड, भारत (प्रकृति की गोद में)।
ध्यान के लिए कुल दिन : 1 सप्ताह।
चैरिटी शुल्क में शामिल है : भोजन, आवास, जड़ी-बूटियांँ आदि।
भाषा : अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत।
- आप प्राप्त करते हैं :
- दैनिक शांति और तनाव मुक्त समय “प्रकृति की गोद में”
- दैनिक आध्यात्मिक योग और आध्यात्मिक मेडिटेशन।
- दैनिक आध्यात्मिक योग और आध्यात्मिक मेडिटेशन।
- एनर्जी हीलिंग।
- प्रेरणादायक उपदेश।
- योग कक्षाओं की नैतिकता।
- अनुशासित दिनचर्या।
- स्वस्थ आयुर्वेद शाकाहारी जीवन शैली।
- आवश्यक आराम के साथ कमरे।
- परमानंद नृत्य।
आश्रम में एक दिन
दैनिक आश्रम कार्यक्रम :
- 06:00 – 06:30 — वैदिक जप और अनुभव
- 06:30 – 08:30 — योग (2Hr)
- 08:30 – 09:00 — नाश्ता
- 09:00 – 09:45 — ध्यान
- 10:00 – 12:00 — शांति समय / उपचार (विशिष्ट उपचार के लिए चिकित्सक समूह के साथ वैकल्पिक)
- 13:00 – 14:30 — फलो का नाश्ता / दोपहर का भोजन
- 15:00 – 17:00 — मेडिटेशन, एक्सरसाइज क्लास, स्पा/थैरेपी, फिजियोथैरेपी क्लास
- 17:00 – 18:00 — योग (1 घंटा)
- 18:00 – 19:00 — संध्या, आयुर्वेद, ध्यान, समूह चर्चा
- 19:30 – 20:30 — रात का खाना
- 21:00 – 05:30 — मौन
भोजन
हम वही हैं जो हम खाते हैं, ये कहावतें सही हैं। इसलिए, जब भोजन करने की बात आती है तो बहुत सावधानी बरती जाती है।
पतंजलि योग सूत्रों में, उन्होंने योग चिकित्सकों की आवश्यकताओं के अनुसार भोजन का वर्णन किया है।
विचारित मनुष्य हमेशा इस बात पर ध्यान रखेगा कि आयुर्वेदिक विचार के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए, उनका सात्त्विक और पौष्टिक भोजन का व्यवस्थित प्रसार किया गया है,
जो न केवल शरीर को बल्कि आत्मा और मन को भी संतुष्ट करता है।
निश्चित भोजन में शामिल हैं :
- नाश्ता
- दोपहर का भोजन
- रात्रि भोजन
- पेय
निश्चित पेय शामिल हैं :
- पानी
- कॉफी
- चाय
निश्चित आहार की आवश्यकता है :
- शाकाहारी
- संतुलित
“यदि आपके पास विशेष आहार आवश्यकताएँ हैं, तो आश्रम करते समय अधिकारी से सलाह करना एक अच्छा विचार है।”