सत्यनारायण कथा

सत्यनारायण कथा

सत्यनारायण भगवान की कथा लोक में प्रचलित है। हिंदू धर्मावलंबियो के बीच सबसे प्रतिष्ठित व्रत कथा के रूप में भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप की सत्यनारायण व्रत कथा है। कुछ लोग मनोकामना पूरी होने पर, कुछ अन्य नियमित रूप से इस कथा का आयोजन करते हैं। Read More

Price : Rs 11,300 +Stage Cost + Decoration

 
 
 

सत्यनारायण भगवान की कथा लोक में प्रचलित है। हिंदू धर्मावलंबियो के बीच सबसे प्रतिष्ठित व्रत कथा के रूप में भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप की सत्यनारायण व्रत कथा है। कुछ लोग मनौती पूरी होने पर, कुछ अन्य नियमित रूप से इस कथा का आयोजन करते हैं। सत्यनारायण व्रतकथाके दो भाग हैं, व्रत-पूजा एवं कथा। सत्यनारायण व्रतकथा स्कंदपुराण के रेवाखंड से संकलित की गई है।

सत्य को नारायण विष्णु के रूप में पूजना ही सत्यनारायण की पूजा है। इसका दूसरा अर्थ यह है कि संसार में एकमात्र नारायण ही सत्य हैं, बाकी सब माया है।

भगवान की पूजा कई रूपों में की जाती है, उनमें से उनका सत्यनारायण स्वरूप इस कथा में बताया गया है। इसके मूल पाठ में पाठांतर से लगभग 170 श्लोक संस्कृत भाषा में उपलब्ध है जो पांच अध्यायों में बंटे हुए हैं। इस कथा के दो प्रमुख विषय हैं- जिनमें एक है संकल्प को भूलना और दूसरा है प्रसाद का अपमान।

व्रत कथा के अलग-अलग अध्यायों में छोटी कहानियों के माध्यम से बताया गया है कि सत्य का पालन न करने पर किस तरह की परेशानियां आती है। इसलिए जीवन में सत्य व्रत का पालन पूरी निष्ठा और सुदृढ़ता के साथ करना चाहिए। ऐसा न करने पर भगवान न केवल नाराज होते हैं अपितु दंड स्वरूप संपति और बंधु बांधवों के सुख से वंचित भी कर देते हैं। इस अर्थ में यह कथा लोक में सच्चाई की प्रतिष्ठा का लोकप्रिय और सर्वमान्य धार्मिक साहित्य हैं। प्रायः पूर्णमासी को इस कथा का परिवार में वाचन किया जाता है। अन्य पर्वों पर भी इस कथा को विधि विधान से करने का निर्देश दिया गया है।

इनकी पूजा में केले के पत्ते व फल के अलावा पंचामृत, पंचगव्य, सुपारी, पान, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, दूर्वा की आवश्यकता होती जिनसे भगवान की पूजा होती है। सत्यनारायण की पूजा के लिए दूध, मधु, केला, गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है जो भगवान को काफी पसंद है। इन्हें प्रसाद के तौर पर फल, मिष्टान्न के अलावा आटे को भून कर उसमें चीनी मिलाकर एक प्रसाद बनता है जिसे सत्तू ( पंजिरी ) कहा जाता है, उसका भी भोग लगता है।

 
 
 
 

 

  •  यह कथा घर में अन्न, धन, लक्ष्मी का आशीष लाती है।

  • इस कथा से वंशजों को सुख, समृद्धि, संतान, यश, कीर्ति, वैभव, पराक्रम, संपत्ति, ऐश्वर्य, सौभाग्य और शुभता का वरदान मिलता है।

  •  यह कथा घर में कराने से पूर्वजों को भी शांति और मुक्ति मिलती है। वे प्रसन्न होकर आशीष देते हैं।

  •  सत्यनारायण की कथा के माध्यम से मनुष्य सत्यव्रत ग्रहण करके वास्तविक सुख-समृद्धि का अधिकारी बन सकता है।

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सत्यनारायण कथा पाठ-पूजा प्रक्रिया विवरण :-

  • पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.

  • पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.

चैरिटी : Rs. 11,300/Couple/Head

  • पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 5100

  • पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100

  •  पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला/हॉल/टेंट : Rs. 5100/दिन (Optional)                                             के लिये दान

  •  पाठ के लिये मूर्ति स्थापना एवं मंच निर्माण : Rs. 500 से Rs. 11000 /दिन (Optional)

  • पाठ के लिये सजावट : Rs. 500 से Rs. 11000 /दिन (Optional)

 
 
 
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