भगवान श्री कृष्ण का जन्म क्यों आवश्यक हुआ?
जब धरती पर अत्याचारी राजा कंस के अत्याचार बढ़ गए और अधर्म चरम सीमा पर पहुंच गया, तब धरती को अधर्म के भार से मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु ने स्वयं श्री कृष्ण के रूप में अवतार लेने का निश्चय किया।


जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्म का पावन उत्सव है। यह पर्व अधर्म पर धर्म की विजय, बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्ति की शक्ति का प्रतीक है। भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को आधी रात में जन्मे भगवान श्री कृष्ण का यह उत्सव भक्तों के हृदय में असीम आनंद और श्रद्धा भर देता है।
जब धरती पर अत्याचारी राजा कंस के अत्याचार बढ़ गए और अधर्म चरम सीमा पर पहुंच गया, तब धरती को अधर्म के भार से मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु ने स्वयं श्री कृष्ण के रूप में अवतार लेने का निश्चय किया।
जब कंस अपनी बहन देवकी को उसके पति वासुदेव के साथ विदा कर रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस के वध का कारण बनेगी। यह सुनकर भयभीत कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया।
भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को आधी रात के समय कारागार में देवकी ने भगवान श्री कृष्ण को जन्म दिया। जन्म के समय संपूर्ण कारागार दिव्य प्रकाश से जगमगा उठा और वासुदेव को दिव्य दृष्टि से इस बालक के भगवान होने का आभास हुआ।
भगवान की कृपा से कारागार के पहरेदार गहरी नींद में सो गए और बेड़ियां स्वतः खुल गईं। वासुदेव जी बालक कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार कर गोकुल में नंद बाबा के घर छोड़ आए और वहां से यशोदा की नवजात कन्या को लेकर वापस कारागार आ गए।
जब कंस को कन्या के जन्म की सूचना मिली, तो उसने उस बालिका का वध करने का प्रयास किया, परंतु वह कन्या उसके हाथों से छूटकर आकाश में देवी रूप में प्रकट हुई और कंस को चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला कहीं और सुरक्षित पल रहा है।
गोकुल और वृंदावन में बालक कृष्ण ने पूतना वध, कालिया नाग दमन और गोवर्धन पर्वत उठाने जैसी अनेक अलौकिक लीलाएं कीं। अपनी बाल सुलभ शरारतों और अद्भुत चमत्कारों से उन्होंने सभी का हृदय जीत लिया।
बड़े होकर श्री कृष्ण मथुरा गए और वहां एक विशाल सभा में अपने मामा कंस का वध कर उसके अत्याचारों का अंत किया। इस प्रकार उन्होंने अपनी माता-पिता को कारागार से मुक्त कराया और मथुरा में पुनः धर्म की स्थापना की।
जन्माष्टमी हमें सिखाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, धर्म और सत्य की रक्षा के लिए भगवान स्वयं प्रकट होते हैं। भगवान श्री कृष्ण का जीवन हमें भक्ति, कर्म और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
भगवान श्री कृष्ण की कृपा से आपका जीवन भक्ति, प्रेम और आनंद से परिपूर्ण रहे।
