

भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप जीवन में सुख, समृद्धि, धन-धान्य और मोक्ष की प्राप्ति कराता है। श्रीहरि की भक्ति से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। विष्णु मंत्रों का नियमित जाप भक्त को भवसागर से पार उतारता है।
॥ १ ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
यह भगवान विष्णु का मूल मंत्र है। इसके जाप से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भक्त को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
॥ २ ॥
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
॥ ३ ॥
ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
यह विष्णु गायत्री मंत्र है। इसके जाप से बुद्धि तेज़ होती है, अज्ञान दूर होता है और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
॥ ४ ॥
ॐ विष्णवे नम:
॥ ५ ॥
ॐ हूं विष्णवे नम:
॥ धन-वैभव मंत्र ॥
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।
यह विशेष मंत्र धन, वैभव एवं संपन्नता पाने के लिए है। इसके नियमित जाप से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है।
॥ लक्ष्मी विनायक मंत्र ॥
दन्ताभये चक्र दरो दधानं,
कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया
लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
यह मंत्र श्री गणेश और माता लक्ष्मी दोनों को एक साथ प्रसन्न करता है, जिससे घर में बुद्धि, रिद्धि-सिद्धि और धन दोनों की कृपा बनी रहती है।
॥ सरल जाप मंत्र ॥
ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
यह सबसे सरल मंत्र है जिसे कोई भी कभी भी जप सकता है। यह मन को शांति और हरि का स्मरण दिलाता है।
॥ विष्णु के पंचरूप मंत्र ॥
ॐ अं वासुदेवाय नम:
ॐ आं संकर्षणाय नम:
ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:
ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:
ॐ नारायणाय नम:
ये पंचरूप मंत्र विष्णु के पांच स्वरूपों (व्यूहों) को समर्पित हैं। इनके जाप से सम्पूर्ण विष्णु तत्व की साधना होती है।
॥ कार्तवीर्यार्जुन मंत्र ॥
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।
यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
यह अत्यंत चमत्कारी मंत्र है। इसके जाप से खोया हुआ धन, वस्तु या संपत्ति वापस मिल जाती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
श्रद्धा और भक्ति से विष्णु मंत्रों के जाप के फल
विष्णु पुराण और अन्य शास्त्रों में वर्णित ये मंत्र भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों और लीलाओं का स्मरण कराते हैं। वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध भगवान विष्णु के चतुर्व्यूह स्वरूप हैं। कार्तवीर्यार्जुन मंत्र विशेष रूप से अनुपस्थित वस्तुओं की प्राप्ति और सौभाग्य के लिए प्रसिद्ध है। लक्ष्मी-विनायक मंत्र एक साथ श्री और विघ्नहर्ता की कृपा प्रदान करता है।
हे जगदीश्वर श्री हरि!
आपके इन पावन मंत्रों के जाप से मेरे जीवन के सभी दोष और दरिद्रता दूर हों।
मुझे शुद्ध भक्ति, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करें।
मेरी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें और मुझे अपनी शरण में लीजिए।
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
🌸 श्री हरि विष्णु भगवान की जय 🌸
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय