

॥ १ ॥ हनुमान मूल मन्त्र ॥
ॐ श्री हनुमते नमः॥
॥ २ ॥ हनुमान गायत्री मन्त्र ॥
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
॥ ३ ॥ मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् मन्त्र ॥
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्।
वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
श्रद्धा, विश्वास और भक्तिभाव से श्री हनुमान मन्त्रों का जप करने से मन को शांति, हृदय को साहस और जीवन को सकारात्मक दिशा प्राप्त होती है।
श्री हनुमान मूल मन्त्र भक्त को पवनसुत हनुमान के चरणों में श्रद्धापूर्वक समर्पित करता है। हनुमान गायत्री मन्त्र बुद्धि, शक्ति, विवेक और आध्यात्मिक प्रकाश की प्रार्थना है। मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् मन्त्र श्री हनुमान जी की तीव्र गति, अद्भुत बल, संयम, बुद्धि और श्रीराम भक्ति का स्मरण कराता है। इन मन्त्रों का जप भक्त के मन में साहस, विश्वास, शांति और सेवा भावना उत्पन्न करता है।
श्री हनुमान जी को संकटमोचन, अंजनीपुत्र, पवनसुत, महाबली और श्रीराम भक्त कहा जाता है। वे भक्ति, शक्ति, बुद्धि, साहस, विनम्रता और निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं। हनुमान जी ने अपने जीवन का प्रत्येक कार्य भगवान श्रीराम की सेवा और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित किया। उनका स्मरण भक्त को कठिन समय में आशा, साहस और आत्मबल प्रदान करता है।
हनुमान जी की सबसे बड़ी पहचान उनकी श्रीराम भक्ति है। उन्होंने अपने मन, वचन और कर्म को प्रभु श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया था। हनुमान मन्त्रों का जप भक्त को भी अपने जीवन में प्रेम, सेवा, विश्वास, धर्म और समर्पण के गुण अपनाने की प्रेरणा देता है।
हे पवनसुत हनुमान,
आप संकटमोचन और श्रीराम के परम भक्त हैं।
मेरे सभी भय, दुःख, रोग और बाधाओं को दूर कीजिए।
मुझे बुद्धि, बल, धैर्य, साहस और भक्ति प्रदान कीजिए।
मुझे सदा सत्य, धर्म और सेवा के मार्ग पर चलने की शक्ति दीजिए।
॥ जय बजरंगबली ॥
🌺 जय श्री राम 🌺
॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥